HomeBuddha Dhammaनामकरण संस्कार और बौद्ध बच्चों के 300 सुंदर नाम

नामकरण संस्कार और बौद्ध बच्चों के 300 सुंदर नाम

पृथ्वी ग्रह पर अरबों जीवित प्राणी वास करते है. इनमें से हम इंसान सबसे बुद्धिमान और चालाक प्राणी बनकर उभरे हैं. और अन्य प्राणियों को अपना गुलाम बनाने में भी कामयाब हुए हैं.

इसी बुद्धिमता का एक ओर परिणाम है – नामकरण संस्कार.

यानि हम इंसानों ने प्रत्येक इंसान को एक नाम देने का तरीका खोजा निकाला है. जिसके तहत हर इंसान को एक विशिष्ट नाम दिया जाता है. और यही नाम उसकी पहचान बन जाती है.

यह नाम विशिष्ट होता है और उसके समाज, जाती, धर्म, संस्कृति, निवास स्थल आदि की पहचान को संजोए रहता है.

इसलिए नामकरण हम इंसानों के जीवन में बहुत महत्व रखता है. खासकर बुद्ध धम्म के अनुयायियों के लिए तो नामकरण संस्कार के अलग ही मायने है.

इस लेख में हम आपको बौद्ध नामकरण संस्कार, बौद्ध बच्चों के नाम कैसे रखते हैं और बौद्ध बच्चों के सुंदर और सार्थक नामों की जानकारी दें रहे हैं.


  1. बौद्ध बच्चों के नाम रखते समय ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें
  2. बौद्ध बच्चों का नामकरण संस्कार
  3. बौद्ध पुरुष नाम (Buddhist Baby Boys Names)
  4. बौद्ध महिला नाम (Buddhist Baby Girls Names)

बौद्ध बच्चों के नाम रखते समय ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें

हमने ऊपर बताया कि इंसानी जीवन में उसके नाम का विशेष महत्व है. इंसान का नाम उसके पूरे जीवन को प्रभावित करता है. एक सुंदर नाम आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम करता है. वहीं एक पुराना, बेहुदा एवं निरर्थक नाम मनोबल को गिराने के लिए ईंधन का काम करता है.

इसलिए, सभी उपासक एवं उपासिकाओं से हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन है कि वे अपने बच्चों का नाम रखते समय निम्न बातों को ध्यान में जरूर रखें.

  • बच्चे का नामकरण संस्कार करवाएं और अपनी बुद्ध धम्म संस्कृति का परिचय दें. ताकि आपको देखकर पड़ोसी भी प्रभावित होवें. और आपके बच्चों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा. संस्कारों का हस्तांतरण होगा.
  • नाम सरल, सुंदर तथा सार्थक हो.
  • उच्चारण का ख्याल जरूर रखें. बोलने में कठिन नाम ना रखें.
  • जाति सूचक नामों का त्याग करें.
  • ईश्वरवाद और भाग्य को दर्शाने वाले नामों से बचें. जैसे; महेश (महा + ईश), नरेश, जगदीश, भाग्य चंद आदि.
  • 22 भीम-प्रतिज्ञाओं का उलंघन नहीं होना चाहिए. इसलिए, राम, ब्रह्मा, विष्णु जैसे नाम बौद्धों के लिए निरर्थक साबित होंगे.
  • हिंदू देवी-देवताओं के नाम जैसे; गणपति, गणेश, गौरी, कृष्ण आदि नामों का जिक्र भी ना करें.
  • इंद्र शब्द से मिलकर बने नामों से हमेशा बचे. और महेंद्र, जितेंद्र, गजेंद्र जैसे नाम ना रखकर अपनी बौद्ध संस्कृति की पहचान को बनाए रखने में सहयोग करें.
  • किसी खास दिन, घटना के चक्कर में नाम को बदनाम करने की मूर्खता से बिल्कुल ना करें. जैसे; बुधवार को जन्मे बच्चे का नाम बुध रख लिया जाए.
  • आप बौद्ध है केवल इसलिए अपने बच्चे का नाम “बुद्ध” ना रखें. यह एक उपाधी है, एक विशिष्ट अवस्था है. जिसे प्राप्त करने के लिए राजकुमार गौतम ने जीवन लगा दिया था. तब जाकर उन्हे बुद्धत्व की प्राप्ती हुई थी और वे “बुद्ध” कहलाए. इसलिए, नाम के बुद्ध ना बनाए.
  • इंटरनेट पर नाम ढूँढ़कर रखने से पहले उसकी पुष्टी भंते या फिर बौद्धाचार्यों से जरूर करें. इसके बाद उस नाम के बारे में विचार करें.
  • बच्चे का नाम बौद्ध संस्कृति को दर्शाने वाला होना चाहिए.

बौद्ध बच्चों का नामकरण संस्कार – Buddhist Baby Naming Ceremony in Hindi

अब सवाल आता है कि यह नामकरण संस्कार क्या होता है? बौद्ध बच्चों का नामकरण कैसे किया जाता है?

नामकरण संस्कार क्या होता है?

श्रमण संस्कृति में संस्कारों का बहुत महत्व है. सभी संस्कारों में नामकरण संस्करण को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है. इसी संस्कार से हमारी पहचान सुनिश्चित होती है. एक छोटा बच्चा इसी नाम से जाना जाता है. इसलिए, बौद्धों में इस दिन को बड़ी ही धूमधाम और विधिपूर्वक मनाया जाता है.

भारतीय बौद्धों में यह संस्कार “संघ-पद्धति” (बहुमत से  नामकरण) से किया जाता है. जिसके तहत संघ बच्चे का नाम सुझाता है और फिर प्रस्तावित नामों में से जिस नाम को ज्यादा बहुमत प्राप्त होता है. उस नाम को बच्चे का नाम घोषित कर दिया जाता है.

आमतौर पर नाम सुझाने का काम संघ द्वारा ही किया जाता है. मगर, बच्चे के माता-पिता, पारिवारिक सदस्य तथा रिश्तेदार भी नाम सुझा सकते है. ऐसा करने पर संघ द्वारा कोई रोक नहीं है.

ध्यान दें

बौद्ध परिवारों में अभी भी कुँआ-पूजन कार्यक्रम प्रचलित है. वे इसके बजाए नामकरण संस्कार को प्राथमिकता दें और ओरों से भी करवाने का आग्रह करें. यदि हम ही अपनी संस्कृति का ख्याल नही रखेंगे तो कौन रखेगा?

नामकरण संस्कार कब करना चाहिए?

वैसे तो नामकरण संस्कार का कोई निश्चित समय नहीं है. उपासक-उपासिकाएं अपनी सहुलियत के हिसाब से उचित समय पर बच्चे का नामकरण करवा सकते है.

लेकिन, यह संस्कार बच्चे की मां के ऊपर निर्भर करता है. और इसका सही समय का निर्धारण भी मां और बच्चे का स्वास्थ्य से निर्धारित होता है.

जब बच्चे की मां कुछ देर तक बैठने की स्थिति में हो जाए तब नामकरण संस्कार करवाया जा सकता है.

एक बात पर गौर करें. बौद्धों में किसी भी कार्य के लिए कोई शुभ-मूहुर्त, शुभ लग्न नहीं होता है. इसलिए, पुरोहितों, ब्राह्मणों से नामकरण का समय निकलवाने का पाखंड़ और मूर्खता ना करें.

नामकरण संस्कार किससे करवाएं अथवा कौन करता है?

नामकरण संस्कार केवल कुशल संस्कारक द्वारा ही कराया जाना चाहिए. किसी भी व्यक्ति द्वारा इस महत्वपूर्ण काम को ना करवाएं.

भारतीय बौद्ध यह कार्य दो व्यक्तियों (संस्कारकों) द्वारा करवा सकते है.

  1. संघ
  2. बौद्धाचार्य

संघ द्वारा: संघ का निर्माण पूज्नीय भंते लोगों से होता है. इसलिए, आपके निवास स्थल के नजदीक बुद्ध विहार है. तो वहां जाकर पूज्नीय भंते को घर पर बुलाकर नामकरण संस्कार करवाया जा सकता है. पूज्नीय भंते सभी संस्कारों में कुशल होते है.

बौद्धाचार्य द्वारा: बौद्धाचार्य एक ग्रहस्थ उपासक-उपासिका होता है. जिसे भारतीय बौद्ध महासभा (The Buddhist Society of India) द्वारा बौद्ध संस्कारों को करवाने का उचित प्रशिक्षण दिया जाता है.

नामकरण संस्कार की विधि यानि नामकरण संस्कार कैसे होता है?

  • सबसे पहले घर की साफ-सफाई करनी चाहिए. इसके बाद उचित जगह पर घर के सदस्यों, मेहमानों और संघ के बैठने का समुचित प्रबंध करना चाहिए. इसके लिए हॉल या आँगन में दरी-पट्टी बिछा लें.
  • आयोजक उपासक-उपासिका एवं परिवारजन सफेद पोशाक पेहनकर तैयार हो जाए. यदि सफेद वस्त्र नहीं पहनना चाहते है तो कोई बात नहीं है. आप अपनी पसंदानुसार पोशाक पहन सकते है. लेकिन, सफेद वस्त्र इस समय ज्यादा उचित रहेंगे.
  • अब भगवान बुद्ध, बाबासाहेब की प्रतिमा या चित्र को संघ (उपस्थित लोग) के सामने ऊंचे स्थान पर स्थापित करें.
  • इसके बाद फूल, मोमबत्ती और अगरबत्ती जलाई जाएं. फल, मिठाई या अन्य खाद्य सामग्री ना रखें और ना ही प्रतिमा पर लगाने (भोग चढ़ाना) की मूर्खता करें. क्योंकि प्रतिमा कुछ नहीं खाती है.
  • संस्कारक (भंते या बौद्धाचार्य) प्रतिमा के बाएं तरफ बैठकर एक लोटा पानी से भरकर उसमें पांच बोधिवृक्ष (पीपल) की पत्तियां रख दें. और सफेद धागे से बना हुआ तिहरा मंगल-सूत्र बनाकर उसका एक छोर लोटे में बांधकर प्रतिमा के पीछे से घुमाकर सामने बैठे बच्चे के माता-पिता तथा परिवारजनों को दोनों हाथों में पकड़ाकर उसके दूसरें छोर को लोटे में डाल दें.
  • यह कार्य पूर्ण होने के बाद वंदना की जाती है.
  • वंदना करने के लिए संघ में उपस्थित सभी उपासक-उपासिकाएं शांति से संस्कारक की बात सुने और उनके कहें अनुसार आचरण करें.
  • आमतौर पर वंदना के दौरान त्रिशरणगमन और पंचशील ग्रहण करवाया जाता है. साथ में बाबासाहेब की अमरकृति “भगवान बुद्ध और उनका धम्म” तथा “धम्मपद” का पाठ करवाया जाता है. इसके लिए उपस्थित उपासक-उपासिकाओं को उकडू बैठकर यह कार्य करना चाहिए.
  • इसके बाद नामकरण की प्रक्रिया आरंभ की जाती है.
  • बच्चे के माता-पिता तथा उनकी अन्य संतानों (यदि है तभी) के नामों का परिचय संघ को करवाया जाता है.
  • अब बच्चे का नामकरण हेतु केवल पांच नाम प्रस्तावित किए जाते है. जिनमें से एक नाम बच्चे के परिवारजनों द्वारा, एक नाम उपासिका संघ (महिलाओं) द्वारा तथा शेष तीन नाम उपासक संघ (पुरुषों) द्वारा प्रस्तावित किया जाता है. फिर, इन पांच नामों पर बारी-बारी से संघ के सदस्यों का मत (हाथ-उठवाकर) लिया जाता है. जिस नाम को अधिक बहुमत प्राप्त होता है. उस नाम की घोषणा संस्कारक द्वारा कर दी जाती है.
  • बहुमत मिलने के बाद भी नाम की उच्चारण सरलता, सुंदरता, सार्थकता तथा बौद्ध संस्कृति की अनुरुपता जांची जाती है.
  • इसके बाद अंतिम नाम की घोषणा करने के बाद बच्चे को आशीर्वाद स्वरुप संस्कारक द्वारा निम्न सुत्त बोला जाता है.

भवतु सब्ब मंगलं रक्खंतु सब्बदेवता
सब्बबुद्धानुभावेन सदा सोत्थि भवंतु ते
भवतु सब्ब मंगलं रक्खंतु सब्बदेवता
सब धम्मानुभावेन सदा सोत्थि भवंतु ते
भवतु सब्ब मंगलं रक्खंतु सब्बदेवता
सब संघानुभावेन सदा सोत्थि भवंतु ते.

  • इसके बाद उपस्थित लोग बच्चे को उपहार देते है. उपहार पश्चात सभी प्राणियों के कल्याण के लिए “सब सुख गाथा” कहते हुए संस्कार पूरा हो जाता है.  
  • इसके बाद आयोजक उपासक-उपासिकाएं अपने स्त्तर पर खाने-पीने का बंदोबश्त करते है. यह वैकल्पिक है और कोई लाग-बांध नहीं होती है. आयोजक उपासक-उपासिका के विवेक पर निर्भर करता है कि घर आए मेहमानों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए?

बौद्ध बच्चों के 300 सुंदर नाम

यहाँ पर आपकी सुविधा के लिए केवल कुछ नाम दिए जा रहे है. शेष नामों के लिए आप हमारी “बौद्ध बच्चों के नाम” वाले लेख को देखें. जिसमें लगभग 1,000 बौद्ध बच्चों के नाम दिए गए है.

बौद्ध पुरुष नाम (Buddhist Baby Boys Names)

  1. अभय
  2. अशोक
  3. अत्तदीप
  4. अनित्य
  5. अविष्कार
  6. अरुण
  7. अभिनीत
  8. अनुनीत
  9. अनिरुद्ध
  10. अनुबोध
  11. अंशुल
  12. अंचल
  13. अनिल
  14. अर्हत
  15. अजय
  16. अनुदेश
  17. अतुल
  18. अनुपम
  19. अरविंद
  20. अभिषेक
  21. अक्षय
  22. आदर्श
  23. आदित्य
  24. आधार
  25. आलेख
  26. आदर
  27. आनंद
  28. आयुष
  29. उदय
  30. उदित
  31. उत्तम
  32. उल्लेख
  33. उतंग
  34. उपोसथ
  35. उपेन
  36. उत्कर्ष
  37. एकांश
  38. एकल
  39. कबीर
  40. कमल
  41. कपिल
  42. केतन
  43. कथन
  44. कुलवंत
  45. कुणाल
  46. किशोर
  47. कुलदीप
  48. कल्याण
  49. खेमराज
  50. ख्याति
  51. खुशवंत
  52. गौतम
  53. गौरव
  54. गगन
  55. चरित्र
  56. चेतन
  57. चयन
  58. जातक
  59. जतिन
  60. जयंत
  61. तिष्य
  62. तिमिर
  63. तरुण
  64. तेजल
  65. तन्मय
  66. तनिष्क
  67. दीपक
  68. दिनांक
  69. दीक्षित
  70. धम्मराज
  71. धम्मवीर
  72. धवल
  73. ध्रुव
  74. धीरज
  75. नागपाल
  76. निवेश
  77. निशंक
  78. निशाध
  79. निहाल
  80. नमन
  81. प्रहसून
  82. पद्म
  83. प्रदीप
  84. प्रज्ञांशु
  85. प्रशस्त
  86. प्रशांत
  87. पीयूष
  88. प्रफुल्ल
  89. पुल्कित
  90. प्रवीर
  91. भीम
  92. भारत
  93. भूषण
  94. भावुक
  95. मयूर
  96. मयंक
  97. मानव
  98. युग
  99. यश
  100. राहुल
  101. राजीव
  102. रक्षित
  103. रतन
  104. लक्ष्य
  105. ललित
  106. विवेक
  107. वैभव
  108. विमल
  109. विराट 
  110. विज्ञांशु
  111. विपुल
  112. विजय
  113. विनय
  114. शिखर
  115. सुदत
  116. सफल
  117. सुनील
  118. सागर
  119. सुधांशु
  120. सुधीर
  121. सक्षम
  122. सारथी
  123. हेमंत
  124. हर्ष
  125. हेतु
  126. हिमांशु
  127. ज्ञानचंद
  128. ज्ञानदेव
  129. ज्ञानवीर
  130. ज्ञानरतन  

बौद्ध महिला नाम (Buddhist Baby Girls Names)

  1. अजया
  2. अशोका
  3. आभा
  4. अमिता
  5. अनिता
  6. अलका
  7. अदीक्षा
  8. अंजली
  9. अनुज्ञा
  10. अंचला
  11. अनुष्का
  12. अवस्था
  13. अमीषा
  14. अनुषा
  15. अनुशी
  16. आशा
  17. आभा
  18. आकृति
  19. आकांक्षा
  20. आरुषी
  21. इंदु
  22. इच्छिता
  23. इक्षिता
  24. इष्टी
  25. ईप्सिता
  26. उपमा
  27. उपाधि
  28. उपासी
  29. उलका
  30. उन्नत
  31. उपेक्षा
  32. ऊषा
  33. एकता
  34. ऐश्वर्या
  35. एकांशी
  36. ऋतु
  37. किरण
  38. कपिला
  39. कामिनी
  40. कृपा
  41. कविता
  42. कृतिका
  43. कणिका
  44. खेमा
  45. ख्याति
  46. गुंजन
  47. गरिमा
  48. गति
  49. गुंजिता
  50. गुमिता
  51. चित्रा
  52. चेतना
  53. चारु
  54. छवि
  55. जया
  56. ज्योति
  57. झलक
  58. तिष्या
  59. तेजसी
  60. तेजस्वी
  61. तुलना
  62. दिव्या
  63. दिशा
  64. दीक्षा
  65. दीपाक्षी
  66. दीपिका
  67. दीप्ती
  68. निर्मला
  69. नीलिमा
  70. नंदिनी
  71. निष्ठा
  72. नम्रता
  73. निलाक्षी
  74. निवृति
  75. नीतू
  76. निखार
  77. नन्या
  78. नीरू
  79. पालि
  80. प्रभा
  81. पद्मा
  82. प्रीती
  83. प्रणाली
  84. प्रतिभा
  85. परिधि
  86. पल्लवी
  87. प्रतिक्षा
  88. प्रज्ञा
  89. प्राची
  90. बरखा
  91. बुलबुल
  92. बोधिलता
  93. भूवि
  94. भूमि
  95. भूमिका
  96. मधु
  97. मुदिता
  98. माया
  99. मेखला
  100. मोनिशा
  101. मनिषा
  102. मैत्री
  103. महिमा  
  104. मानसी
  105. मान्यता
  106. मेघना
  107. युक्ति
  108. यामिनी
  109. याचिका
  110. रागिनी
  111. रतना
  112. रश्मि
  113. रितु
  114. रुचि
  115. रचना
  116. रजनी
  117. रुचिता
  118. लता
  119. ललिता
  120. लतिका
  121. लिखिता
  122. विजया
  123. विद्या
  124. विशाला
  125. वीणा
  126. विमला
  127. वाटिका
  128. विदिता
  129. विशाखा
  130. शीला
  131. शैफाली
  132. श्वेता
  133. शशि
  134. शोभा
  135. शांता
  136. शिखा
  137. शीर्षा
  138. शुभाक्षी
  139. शिक्षा
  140. सुलेखा
  141. स्मित्रा
  142. सुधा
  143. सुरेखा
  144. सुहासी
  145. सुधिता
  146. संचिता
  147. संज्ञा
  148. स्मिता
  149. सोनाक्षी
  150. सृजिता
  151. हेमलता
  152. हेमा
  153. हिमाली
  154. हर्षा
  155. हिमाक्षी
  156. हर्षिता
  157. हिमांशी
  158. क्षमा
  159. श्रद्धा
  160. श्रुति

बौद्ध बच्चों का नामकरण संस्कार पढ़कर आपको अपने बौद्ध बच्चों का नामकरण करने का तरीका पता चल गया होगा. हमें पूर्ण उम्मीद है कि यह लेख आपके लिए बहुत ही उपयोगी रहा है.

आपसे एक गुजारिश है. इस लेख को अपने साथियों के साथ जरूर शेयर करें. ताकि उन्हे भी मालूम चलें कि बौद्ध बच्चों का नामकरण कैसे करते है?  


भवतु सब्बमंगलं! —

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