HomeBuddha Dhammaसात प्रकार की पत्नियां (ग्रहणीयां)

सात प्रकार की पत्नियां (ग्रहणीयां)

एक बार भगवान गौतमत बुद्ध अनाथपिंडक सेठ के घर पधारे. वे बातचीत कर ही रहे थे कि अंतःपुर में कलह होने की आवाज सुनाई दी. तथागत बुद्ध के उस संबंध में पूछने पर सेठ ने बताया कि वे अपनी बहू सुजाता के कारण बड़े परेशान हैं. वह बड़ी अभिमानि है, पति का अनादर करती है और हमारी अवज्ञा. इसी कारण घर में हमेशा कलह रहता है. तथागत ने सेठ से बहू को भेजने को कहा. उसके आने पर उन्होंने उससे प्रश्न किया- ‘बताओ भला, तुम वधिकसम, चोरसमा, अरियसम (wise like persons),  मातुसमा, भगिनीसमा, सखीसमा, दासीसमा इन सात प्रकार की गृहिणियों में से कौन हो?’

सुजाता बोली- ‘मैं इनका तात्पर्य समझी नहीं. कृपया स्पष्ट करें.’

तब तथागत भगवान बुद्ध बोले:

1. जो दूषित चित्त वाली होती है जो अहित चाहने वाली होती है जो पति की उपेक्षा कर अन्यों के प्रति अनुरक्त रहती है, जो धन द्वारा खरीदे गए (दास) से हत्या कराने को उत्सुक रहती है, पुरुष की ऐसी भार्या (पत्नी) को वधक चित्त भार्या कहा जाता है.

2. जो अपने पति द्वारा दिए गए धन सम्पत्ति को फिजूल में उड़ाकर नष्ट कर देती है. वह ‘चोरसमा’ होती है.

3. जो निकम्मी रहने वाली, आलस्यप्रधान, खूब खाने पीने वाली, प्रचण्ड, अपशब्द बोलने वाली तथा पति के उत्साह को दबा देने वाली ऐसी मालकिन जैसी पत्नी “अय्या सम” भार्या कहलाती है.

4. जो सदैव हित चाहने वाली होती है, पति की इस प्रकार देखभाल करती है जैसे माता पुत्र की, जो पति के कमाए हुए धन की रक्षा करती है. पुरुष की इस प्रकार की भार्या (पत्नी ) माता जैसी भार्या कहलाती है.

5. जो छोटी या बड़ी बहन के समान अपने पति के प्रति गौरव का भाव रखती है, लज्जाशील होती है, पति की आज्ञा में रहने वाली होती है – पुरुष की ऐसी भार्या को बहन (भगिनी) समान भार्या कहते हैं.

6. जैसे चिरकाल (बहुत समय) के अनन्तर आगत सखा (आये हुए मित्र) को देखकर कोई सखी प्रसन्न होति है, उसी प्रकार जो कुलीन, शीलवान, पतिव्रता नारी अपने पति को देखकर पमुदित  भीतर तक प्रसन्न चित्त) होती है – पुरुष की ऐसी भार्या को “ सखी (मित्र समान) जैसी भार्या” कहते हैं.

7.जो मारने-पीटने का डर दिखाए जाने पर भी क्रोधित न होने वाली, शान्त रहने वाली, दोष रहित चित्त (without hatred will) से पति (की हर बात) को सहन करती है, जिसे क्रोध नहीं आता, जो स्वामी (पति) के वश में रहने वाली होती है – पुरुष की इस प्रकार की भार्या को “दासी समान भार्या” कहते हैं.

जो वधक जैसी, चोरनी जैसी तथा मालकिन (अय्या) जैसी भार्या हैं ये दुस्सील (immoral behave) होती हैं, कठोर स्वभाव वाली होती हैं, पति का आदर न करने वाली होती हैं, ऐसी भार्यायें शरीर छूटने पर नरक गामिनी होती हैं.

जो माता जैसी, बहन जैसी, सखी जैसी और दासी जैसी भरिया (पत्नी, भार्या) कहलाती हैं, ये शीलवान भार्यायें दीर्घकाल तक संयत जीवन बिताने के कारण शरीर छूटने पर सग्ग (स्वर्ग) लोक में भव (उतपन्न हो जीवन) पाती हैं.

सुजाता ये सात प्रकार की भार्याएं (पत्नियाँ) होती हैं, इन सातों में से तुम स्वयं को किस प्रकार की पत्नी मानती हो?

भन्ते (आदरणीय)!

आज से आप मुझे मेरे स्वामी की दासी (सेविका, परिचारिका) समान भार्या समझें.

संकलनकर्ता: अनिल गौतम – स्रोत – तिपिटक (अ. नि. 7.6.10. भरियासुत्तं) [10 भरिया सुत्त, ७.अब्याकत्त वग्ग अंगुत्तर निकाय सत्तक निपात]

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