HomeDhammapadनागवग्गो

नागवग्गो

अहं नागोव सङ्गामे, चापतो पतितं सरं
अतिवाक्यं तितिक्खिस्सं
, दुस्सीलो हि बजुज्जनो.

हिंदी: जैसे किसी संग्राम में हाथी धनुष से छोड़े गये बाण को सहन करता है वैसे हीमैं दूसरों के कटुवचन को सहन करुंगा, क्योंकि संसार में दु:शील व्यक्ति ही अधिक हैं.

दन्तं नयन्ति समितिं, दन्तं राजाभिरूहति
दन्तो सेट्ठो मनुस्सेसु
, योतिवाक्यं तितिक्खति.

हिंदी: दान्त (शिक्षित) हाथी को परिषद में ले जाते हैं. दान्त पर ही राजा चढ़ता है. मनुष्यों में भी दान्त व्यक्ति ही श्रेष्ठ होता है जो कि कटुवचन को सह लेता है.

वरमस्सतरा दन्ता, आजानीया च सिन्धवा
कुञ्जरा च महानागा
, अत्तदन्तो ततो वरं.

हिंदी: खच्चर, अच्छी नसल के सैंधव घोड़े और महानाग हाथी दान्त (शिक्षित) होने पर उत्तम होते हैं, परंतु अपने आप को दान्त किया हुआ पुरुष उनसे श्रेष्ठ होता है.

न हि एतेहि यानेहि, गच्छेय्य अगतं दिसं
यथात्तना सुदन्तेन
, दन्तो दन्तेन गच्छति.

हिंदी: इन (हाथी, घोड़े आदि) सवारियों से बिना गयी दिशा (निर्वाण) तक नहीं जाया जा सकता, जैसे कि अपने आप को सुदान्त बना कर, कोई दान्त व्यक्ति दान्त (इंद्रियों) के साथ वहां तक चला जाता है.

धनपाल नाम कुञ्जरो, कटुक भेदनो दुन्निवारयो
बद्धो क बळंन भुज्जति
, सुमर्ति नागवनस्स कुञ्जरो.

हिंदी: दुर्निवार, धनपाल नाम का हाथी जिसकी कनपटी से मद चू रहा है, बँध जाने पर कवल (कौर) नहीं खाता, बल्कि नागवान (हाथियों के जंगल) का स्मरण करता है.

मिद्धी यदा होति महग्घसो च, निद्दायिता सम्परिवत्तसायी
महावराहोव निवापपुट्ठो
, पुनप्पुनं गब्भमुपेति मन्दो.

हिंदी: जो पुरुष आलसी, पेटू, निद्रालु, करवट बदल-बदल कर सोने वाला, और दाना खाकर पुष्ट हुए मोटे सूअर के समान होता है, वह मंदबुद्धि बार-बार गर्भ में पड़ता है.

इदं पुरे चित्तमचारि चारिकं, येनिच्छकं यत्थकामं यथासुखं
तदज्जहं निग्गहेस्सामि योनिसो
, हत्थिप्पभिन्नं विय अङ्कुसग्गहो.

हिंदी: यह जो जहां इच्छा हो, जहां कामना हो, जहां सुख दिखे, वहां चलायमान हो जाने वाल चित्त है, पहले इसे अचंचल बनाउँगा. इसे ऐसे ही भलीभांति वश में करूंगा जैसे कि अंकुशधारी महावत बिडॅड़ैल हाथी को वश में करता है.

अप्पमादरता होथ, सचित्तमनुरक्खथ
दुग्ग उद्धरथत्तानं
, पङ्के सन्नोव कुञ्जरो.

हिंदी: अप्रमाद में जुटो. अपने चित्त की रक्ष करो. कीचड़ में धँसे हाथी के समान अपने आपको कठिन मार्ग से बाहर निकालो और निर्वाण के धरातल पर प्रतिष्ठापित करो.

सचे लभेथ निपकं सहायं, सद्धिं चरं साधुविहारिधीरं
अभिभुय्य सब्बानि परिस्सयानि
, चरेय्य तेनत्तमनो सतीमा.

हिंदी: यदि किसी को साथ चलने के लिए कोई साधुविहारी, धैर्यसंपन, बुद्धिमान साथी मिल जाय, तो वह सारी परेशानियों को ताक पर रख कर प्रसनवदन और स्मृतिमान होकर उसके संग विचरण करे.

नो चे लभेथ निपकं सहायं, सद्धिं चरं साधुविहारिधीरं
राजाव रट्ठं विजितं पहाय
, एकोचरे मातङ्गरञ्ञेव नागो.

हिंदी: यदि किसी को साथ चलने के लिए कोई साधुविहारी, धैर्यसम्पन, बुद्धिमान साथी न मिले, तो वह पराजित राष्ट्र को छोड़कर जाते हुए राजा के समान अथवा हस्तिवन में हाथी के समान अकेला विचरण करे.

एकस्स चरितं सेय्यो, नत्थि बाले सहायता
एकोचरे न च पापानि कयिरा
, अप्पोस्सुक्को मातङ्गरञ्ञेव नागो.

हिंदी: अकेला विचरना उत्तम है, किंतु मूढ़ की मित्रता अच्छी नहीं. हस्तिवन में हाथी के समान अनासक्त होकर अकेला निचरण करे और पाप न करे.

अत्थम्हि जातम्हि सुखा सहाया, तुट्ठी सुखा या इतरीतरेन
पुञ्ञं सुखं जीवितसङ्खयम्हि
, सब्बस्स दुक्खस्स सुखं पहानं.

हिंदी: काम पड़ने पर मित्रों का होना सुखकर है. जिस किसी (छोटी या बड़ी) चीज से संतुष्ट हो जाना (यह भी) सुखकारक है. जीवन के क्षय होने पर किया हुआ पुण्य सुखदायक होता है. सारे दु:खों का प्रहाण (अरहंत हो जाना) सर्वाधिक सुखकर है.

सुखा मत्तेय्यता लोके, अथो पेत्तेय्यता सुखा
सुखा सामञ्ञता लोके
, अथो ब्रह्मञ्ञता सुखा.

हिंदी: लोक में माता की सेवा करना सुखकर है, और ऐसे ही पिता की सेवा भी सुखकर है. लोक में श्रमण की सेवा (आदर) करना सुखकर है, और ऐसे ही ब्राह्मण की सेवा आदर करना भी सुखकर है.

सुखं याव जरा सीलं, सुखा सद्धा पतिट्ठिता
सुखो पञ्ञाय पटिलाभो
, पापानं अकरणं सुखं.

हिंदी: बुढ़ापे तक शील का पालन करना सुखकर होता है, अचल श्रद्धा सुखकर होती है, प्रज्ञा का लाभ सुखकर होता है, और पाप कर्मों का न करना सुखकर होता है.


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— भवतु सब्ब मङ्गलं —

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