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पापवग्गो

अभित्थरेथ कल्याणे, पापा चित्तं निवारये
दन्धञ्हि करोतो पुञ्ञं, पापस्मिं रमती मनो.

हिंदी: पुण्य (कर्म) करने में जल्दी करे, पाप (कर्म) से चित्त को हटाये, क्योंकि धीमी गति से पुण्य (कर्म) करने वाले का मन पाप (कर्म) में लीन होने लगता है.

पापञ्चे पुरिसो कयिरा, न नं कयिरा पुनप्पुनं
न तम्हि छन्दं कयिराथ, दुक्खो पापस्स उच्चयो.

हिंदी: यदि पुरुष (कभी) पाप (कर्म) कर डाले, तो उसे बार-बार (तो) न करे. वह उसमें रुचि न ले, क्योंकि पाप (कर्मों) का संचय दु:ख का (कारण) होता है.

पुञ्ञञ्चे पुरिसो कयिरा, कयिरा नं पुनप्पुनं
तम्हि छन्दं कयिराथ, सुखो पुञ्ञस्स उच्चयो.

हिंदी: यदि पुरुष (कभी) पुण्य (कर्म) करे, तो उसे बार-बार करे. वह उसके प्रति उत्साह जगाये, (क्योंकि) पुण्य (कर्मों) का संचय सुख (का कारण) होता है.

पापोपि पस्सति भद्रं, याव पापं न पच्चति
यदा च पच्चति पापं, अथ पापो पापानि पस्सति.

हिंदी: पापी भी (पाप को) (तब तक) अच्छा ही समझता है जब तक पाप का विपाक नहीं होता. और जब पाप का विपाक होता है, तब पापी पापों को देखने लगता है.

भद्रोपि पस्सति पापं, याव भद्रं न पच्चति
यदा च पच्चति भद्रं, अथ भद्रो भद्रानि पस्सति.

हिंदी: भद्र (पुण्य करने वाला व्यक्ति) भी तब तक पाप को देखता है जब तक पुण्य का विपाक नहीं होता. जब पुण्य का परिपाक होता है, तब (वह) भद्र (व्यक्ति) पुण्यों को देखने लगता है.

मावमञ्ञेथ पापस्स, न मं तं आगमिस्सति
उदबिन्दुनिपातेन, उदकुम्भोपि पूरति
बालो पूरति पापस्स, थोकं थोकम्पि आचिनं.

हिंदी: ‘वह मेरे पास नहीं आयेगा’ – ऐसा (सोच कर) पाप की अवहेलना न करे. बूंद्-बूंद पानी गिरने से घड़ा भर जाता है. (ऐसे ही) थोड़ा-थोड़ा संचय करता हुआ मूढ़ (व्यक्ति) पाप से भर जाता है.

मावमञ्ञेथ पुञ्ञस्स, न मं तं आगमिस्सति
उदबिन्दुनिपातेन, उदकुम्भोपि पूरति
धीरो पूरति पुञ्ञस्स, थोकं थोकम्पि आचिनं.

हिंदी: ‘वह मेरे पास नहीं आयेगा’ – ऐसा (सोचकर) पुण्य की अवहेलना न करे. बूंद-बूंद पानी गिरने से घड़ा भर जाता है. (ऐसे ही) थोड़ा-थोड़ा संचय करता हुआ धीर (व्यक्ति) पुण्य से भर जाता है.

वाणिजोव भयं मग्गं, अप्पसत्थो महद्धनो
विसं वीवितुकामोव, पापानि परिवज्जये.

हिंदी: जैसे छोटे काफिले (परंतु) विपुल धन वाला व्यापारी भयमुक्त मार्ग को, अथवा जीवित रहने की इच्छा वाला (व्यक्ति) विष को (छोड़ देता है), (वैसे ही) (मनुष्य) पापों को छोड़ दे.

पाणिम्हि चे वणो नास्स, हरेय्य पाणिना विसं
नाब्बणं विसमन्वेति, नत्थि पापं अकुब्बतो.

हिंदी: यदि हाथ में व्रण (घाव) न हो तो हाथ से विष को ले सकता है (क्योंकि) व्रणरहित शरीर में विष नहीं चढ़ता है. ऐसे ही पापकर्म ने करने वाले को पाप नहीं लगता.

यो अप्पदुट्ठस्स नरस्स दुस्सति, सुद्दस्स पोसस्स अनङगणस्स
तमेव बालं पच्चेति पापं, सुखुमो रजो पटिवातं व खित्तो.

हिंदी: जो निरपराध, निर्मल, दोषरहित व्यक्ति पर दोषारोपण करता है, उस (दोष लगावे वाले) मूर्ख को ही पाप लगता है; जैसे पवन की उल्ती दिशा में फेंकी गई सूक्ष्म रज फेंकने वाले पर आ गिरती है.

गम्भमेके उप्पज्जन्ति, निरयं पापकम्मिनो
सग्गं सुगतिनो यन्ति, परिनिब्बन्ति अनासवा.

हिदी: कोई मनुष्य लोक में गर्भ में उत्पन्न होते हैं, पापकर्म नरक में जाते हैं, सुगति वाले स्वर्ग में जाते हैं, और अनाश्रव (चित्तमलरहित) निर्वाण-लाभ करते हैं.

न अन्तलिक्खे न समुद्दमज्झे, न पब्बतानं विवरं पविस्स
न विज्जती सो जगततिप्पदेसो, यत्थट्ठितो मुच्चेय्य पापकम्मा.

हिंदी: न अनंत आकाश में, न समुद्र की गहराइयों में, न पर्वतों की गुहा-कंदराओं में प्रवेश करके इस जगत में, कहीं भी तो ऐसा स्थान नहीं है जहां ठहरा हुआ कोई अपने पापकर्मों (अकुशल संस्कारों के कर्मफलों) को भोगने से बच सके.

न अन्तलिक्खे न समुद्दमज्झे, न पब्बतानं विवरं पविस्स
न विज्जती सोजगतिप्पदेसो, यत्थट्ठितं नप्पसहेय्य मच्चु.

हिंदी: न अनंत आकाश में, न समुद्र की गहराइयों में, न पर्वतों की गुहा-कंदराओं में प्रवेश करके इस जगत में कहीं भी ऐसा स्थान नहीं है जहां ठहरे हुए को मृत्यु न पकड़ ले, न दबोच लें.


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— भवतु सब्ब मंगलं—

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