HomeDhammapadलोकवग्गो

लोकवग्गो

हीनं धम्मं न सेवेय्य, पमादेन न संवसे
मिच्छादिट्ठिं न सेवेय्य, न सिया लोक वड्ढनो.

हिंदी: (पांच काम गुणों वाले) निकृष्ट धम्म का सेवन न करें, न प्रमाद में लिप्त हों, मिथ्यादृष्टि को न अपनाये, और अपने आवागमन को बढ़ाने वाला न बने.

उत्तिट्ठे नप्पमज्जेय, धम्मं सुचरितं चरे
धम्मचारी सुखं सेति, अस्मिं लोके परम्हि च.

हिंदी: उठे (उत्साही बने) प्रमाद न करें, सुचरित धम्म का आचरण करें, धम्मचारी इस लोक और परलोक (दोनों जगह) सुखपूर्वक विहार करता है.

धम्मं चरे सुचरितं, न तं दुच्चरितं चरे
धम्मचारी सुखं सेति, अस्मिं लोके परम्हि च.

हिंदी: सुचरित धम्म का चरण करें, दुराचरण से बचे, धम्मचारि इस लोक और परलोक (दोनों जगह) सुखपूर्वक विहार करता है.

यथा बुब्बुळकं पस्से, यथा पस्से मरीचिकं
एवं लोकं अवेक्खन्तं, मच्चुराजा न पस्सति.

हिंदी: जो (इस) लोक को बुलबुले के समान और मृग-मरीचिका के समान देखे, उस (ऐसे देखमे वाले ) की ओर मृत्युराज (आंख उठा कर) नहीं देखता.  

एथ पस्सथिमं लोकं, चित्तं राजरथूपमं
यत्थ बाला विसीदन्ति, नत्थि सङगो विजानतं.

हिंदी: आओ, चित्रित राजरथ के समान इस लोक को देखो जहां मूढ़ (जन) आसक्त होते हैं, ज्ञानी जन आसक्त नहीं होते.

यो च पुब्बे पमज्जित्वा, पच्छा सो नप्पमज्जति
सोम लोकं पभासेति, अब्भा मुत्तोव चन्दिमा.

हिंदी: जो पहले प्रमाद करके (भी) पीछे प्रमाद नहीं करता, वह मेघमुक्त चंद्रमा की भांति इस लोक को प्रकाशित करता है.

यस्स पापं कतं कम्मं, कुसलेन पिधीयति
सोमं लोकं पभासेति, अब्भा मुत्तोव चन्दिमा.

हिंदी: जो अपने पहले कि ये हुए पाप कर्म को (वर्तमान के) कुशल कर्म से ढक लेता है, वह मेघमुक्त चंद्रमा की भांति इस लोक को खूब प्रकाशित करता है.

अंधभूतो अयं लोको, तनुकेत्थ विपस्सति
सकुणो जालमुत्तोव, अप्पो सग्गाय गच्छति.

हिंदी: यह लोक (प्रज्ञा चक्षु के अभाव में) अंधे जैसा है, यहां विपश्यना अक्रने वाले थोढ़े ही हैं, जाल से मुक्त हुए पक्षी की भांति विरले ही सुगति अथवा निर्वाण को जाते हैं, (बाकि तो जाल में ही फंसे रहते हैं).

हंसादिच्चपथे यन्ति, आकासे यन्ति इद्धिया
नीयन्ति धीरा लोकम्हा, जेत्वा मारं सवाहिनिं.

हिंदी: हंस सूर्य-पथ (आकाश) में जाते हैं, (कोई) ऋद्धि-बल से आकाश में जाते हैं, पंडित लोग सेना सहित मार को जीत कर (इस) लोक से (निर्वाण को) ले जाये जाते हैं (अर्थात, निर्वाण प्राप्त कर लेते हैं).

एकं धम्मं अतीतस्स, मुसावादिस्स जन्तुनो
वितिण्णपरलोकस्स, नत्थि पापं अकारियं.

हिंदी: एक धम्म (सत्य) का अतिक्रमण कर जो झूठ बोलता है, परलोक के प्रति उदासीन ऐसे प्राणी के लिए कोई इस प्रकार का पाप नहीं रह जाता जो वह न कर सके.

न वे कदरियादेवेलोकं वजन्ति, बाला हवे नप्पसंसन्ति दानं
धीरो च दानं अनुमोदमानो, तेनेव सो होति सुखी परत्थ.

हिंदी: कृपण (लोग) देवलोक में नहीं जाते हैं, मूढ़ (लोग) ही दान की प्रशंसा नहीं करते हैं, पंडित (व्यक्ति) दान का अनुमोदन करता हुआ उसी (कर्म के आधार) से परलोक में सुखी होता है.

पथब्या एकरज्जेन, स्ग्गस्स गमनेने वा
सब्बलोकाधिपच्चेन, सोतापत्तिफलं वरं.

हिंदी: पृथ्वी के एकछत्र राज्य, अथवा स्वर्गारोहण, (अथवा) सारे लोकों के आधिपत्य से अधिक उत्तम है स्रोतापति का फल.


ओडियो सुने


— भवतु सब्ब मंगलं —

Must Read

spot_img